कितना अच्छा होता
तुम नीले समुद्र होते और मै तुम्हारी लहर,
खुल के इठलाती तुम्हारे शोर पर.
कितना अच्छा होता
तुम आसमा होते और मै तुम्हारा पीछा करती ज़ॅमी
आँखे भर देखती तुम्हे , नही महसूस होती तुम्हारी कमी
कितना अच्छा होता
तुम कोई तराना होते और मै तुम्हारी धुन,
तुम्हारे बिना अधूरी तुम्हारे साथ ही पूर्ण
कितना अच्छा होता
तुम मतवाली हवा होते और मै ओस की सोंधी ठंड
गमकता हमारा मिलन , जैसे मिट्टी और गीली पवन.
कितना अच्छा होता
की तुम होते, किसी भी रूप मे
सुकून भरी छांव या फिर तिलमिलाती धूप मे
बस अच्छा होता की तुम होते.
– shruti